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महिला सशक्तिकरण महिला सशक्तिकरण .. किसी से डर रहे हो, वक्त है अब डराने का किसी ने डरा धमकाकर सताया बहुत है, वक्त है अब आवाज उठाने का किसी ने मजबूर कराया है, वक्त है पलटकर जवाब देने का अब नहीं है डरना, हमें है करना। महिलाओं के साथ हिंसा व अन्य अपराध न सिर्फ भारत अपितु संपूर्ण विश्व के लिए बडी समस्या है, महिलाएँ समाज में लोक लाज के डर, भय, सही जानकारी का अभाव, विश्वास की कमी, कानून से मदद की अपेक्षा के संकोच के कारण चुप रह जाती हैं, जो निरंतर समाज में मौजूद एसे दुराचारियों को बल प्रदान करता है। ज्यों त्यों महिलाओं को हिंसा व अन्य अपराधों से शिकार होने पर मानसिक और शारीरिक रुप से अंदर ही अंदर दुर्बल बनाता है। वक्त है आवाज बुलंद करने का, न्याय है आपका अधिकार जिस प्रकार थाली में रखा भोजन स्वयं मुख में नहीं जाता है, भूख मिटाने के लिए खाना होगा। ठीक उसी प्रकार न्याय के लिए आपको अपने साथ हुई हिंसा को सामने लाकर माकूल जवाब देना होगा। यह भी याद रखे, आपका यह कदम आपको जानने वाले पीडितों को उर्जा से भर देगा, आप उम्मीद की किरण बन किसी अन्य के जीवन की घुटन खत्म कर आजादी दिलाने में सहायक होंगे।